फ़्रांस प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, चीन के नेशनल बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने इसके लिए पूरी तैयारी कर ली है।
ग़ौरतलब है कि चीनी विशेषज्ञों ने वैक्सीन के टेस्ट के पहले दो चरणों का काम देश में ही अंजाम दिया है, लेकिन चीन में नए कोरोना मरीज़ों की संख्या में कमी आने की वजह से इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें एक दूसरे देश की सेवाएं लेने की ज़रूरत पड़ रही है।
हालांकि चीन के नेशनल बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने संयुक्त अरब इमारात में टेस्ट किए जाने वाले वैक्सीन का नाम या अधिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
चीन के अलावा, कोरोना वायरस की वैक्सीन विकसित करने में अमरीका ने भी प्रगति करने का दावा किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना वायरस की वैक्सीन इस साल के आख़िर में या अगले साल की शुरूआत में बाज़ार में आ जाएगी।
इससे पहले वाशिंगटन ने चीन पर आरोप लगाया था कि चीनी हैकर्स वैक्सीन के बारे में ज़रूरी दस्तावेज़ों को चुराने का प्रयास कर रहे हैं।
चीन से शुरू होने वाली कोरोना वायरस महामारी से पूरी दुनिया में अब तक 92 लाख से ज़्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं, जबकि मरने वालों की संख्या लगभग 4 लाख 80 हज़ार हो चुकी है।